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✨‌️𝆺𝅥⃝᪵̽𝆺꯭𝅥̽⟬꯭𝄄꯭꯭𝅥‌꯭꯭𝆬 𝐃𝚲𝐒𝐓𝚲𝐍-𝚵-𝐌𝐎𝐇𝚲𝐁𝐁𝚲𝐓𝆺꯭𝅥🌼𝆺꯭𝅥༊꯭♡︎࿐

Mental_VNM
सिर्फ उसकी यादों में तेरा इस कदर तड़पना जरूरी था क्या राख होता हुआ वजूद मुझसे थक कर सवाल करता है मोहब्बत करना तेरे लिए इतना ही जरुरी था क्या 𝗢𝘄𝗻𝗲𝗿- @ll_Oye_Mallick_ll
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Entertainment & Media
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Female
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25-34
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Middle
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Summary
March 08, 14:06

Shayari post krna hai kisse ko admin Dunga mai contact karo
@mental_vnm
@ll_Oye_Mallick_ll

March 08, 09:16
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March 07, 13:21
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March 06, 15:28
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March 05, 10:03


‌️𝆺𝅥⃝᪵̽𝆺꯭𝅥̽⟬꯭𝄄꯭꯭𝅥‌꯭꯭𝆬 𝐃𝚲𝐒𝐓𝚲𝐍-𝚵-𝐌𝐎𝐇𝚲𝐁𝐁𝚲𝐓𝆺꯭𝅥
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March 05, 10:03
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🌿
🪷
*श्रीकृष्ण ज्ञान*
🪷
🌿

*कर्म का अटल न्याय*

जो दूसरों को दुख देकर हँसता है,
वह यह भूल जाता है कि समय सब देख रहा है।

होनी जब लौटती है,
तो वही पीड़ा सौ गुना बनकर
मन को झकझोर देती है।
⚖️
इसलिए किसी का दिल दुखाने से पहले
एक क्षण ठहर कर सोचिए —
यदि यही वज्र मेरे सिर पर गिरे,
तो क्या मैं सह पाऊँगा?
💛
*श्रीकृष्ण सिखाते हैं —*
_दूसरों के आँसू कभी व्यर्थ नहीं जाते।_
_हर आह सीधी न्याय तक पहुँचती है।_

*क्या आपके शब्द और व्यवहार किसी को सुख दे रहे हैं या पीड़ा?*
🪔

March 05, 09:47
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March 04, 15:25

वो बस्ते का बोझ और यादों का खज़ाना
वो सुबह की नींद का कच्चा नाता,
वो माँ का ज़बरदस्ती हमें जगाना।
आँखें मलते हुए बस की तरफ भागना,
और पीछे से माँ का 'टिफिन ले लो' चिल्लाना।
भारी बस्ता कंधों पर, पर दिल बिलकुल हल्का था,
हर मुश्किल का हल तब बस एक छोटा सा छर्रा था।
वो प्रार्थना की लाइन में पीछे खड़े होकर बतियाना,
और टीचर को देख अचानक 'इतनी शक्ति हमें देना' गाना।
चौक की वो डस्ट, ब्लैकबोर्ड का वो कालापन,
वहीं तो रंगा था हमारा मासूम सा बचपन।
वो रफ कॉपी के पीछे 'कट्टम-कुट्टम' का खेल,
दोस्ती ऐसी कि जैसे हो लोहे का मेल।
पेंसिल की नोक टूटना और शापनर का गुमान,
रबड़ खो जाने पर जैसे जाता था जहान।
डेस्क पर नाम कुरेदना अपनी पहचान बनाना,
और पेन की स्याही से उँगलियों को सजाना।
पीरियड के बीच में छुपकर टिफिन का खाना,
वो आम का अचार और पराठे का दीवाना।
घंटी बजते ही जैसे पिंजरा खुल जाता था,
पूरा स्कूल गलियारे में उमड़ आता था।
वाटर बोतल से पानी नहीं, प्यार पीते थे,
हम असल में उसी एक घंटे में जीते थे।
वो पीटी के पीरियड में धूप का सुहानापन,
और रेस में जीतने का वो पागल सा जुनून।
तब लगता था कि कब आज़ाद होंगे हम,
कब इस स्कूल की कैद से बाहर होंगे हम।
पर आज जब पीछे मुड़कर उन गलियों को देखते हैं,
तो अपनी आज़ादी को स्कूल की उस 'कैद' से तौलते हैं।
अब न वो लाइनें हैं, न वो बेंचों का शोर है,
ज़िंदगी अब भाग रही किसी अनजानी ओर है।
डिग्रियाँ तो हाथ में हैं, पर वो हुनर खो गया,
वो बेपरवाह बच्चा कहीं भीड़ में सो गया।
> "किताबों के बीच दबी वो सूखी गुलाब की पत्ती तो नहीं मिली, पर स्कूल की यादों ने आज दिल की हर धूल साफ कर दी।"

March 03, 17:12

हर नजर को एक नजर की तलाश है .।।
👀
उस चेहरे मे कुछ तो खाश है
🗣️
आप से दोस्ती हम युं नहीं कर बैठे
🤞
🥰
🥳
क्या करे हमारी पसंद ही कुछ खाश है
☺️
🤭

March 03, 07:53
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