
अमित आर्यावर्त (भारत योगी)
मैं तो ऐसे हिंदुओं से कहता हूँ कि भाई, ये फेरों का ढोंग भी क्यों कर रहे हो? मुसलमानों की तरह तीन बार “कबूल” बोल लो, और भी जल्दी विवाह हो जाएगा तुम्हारा।
बात ये है कि हिंदुओं की शादी में एक बड़ा ही गलत काम चल रहा है। हिंदू गंदे-भद्दे गानों पर नाचने में कई घंटे बर्बाद कर देता है। दारू पीने में और दुनिया भर की बकवास नौटंकी में बहुत ज्यादा समय खराब कर देता है।
किंतु जब बात फेरों की आती है तो कहता है — “पंडित जी, जल्दी करवा दो फेरे।”
अरे, ज़रूरत क्या है? फेरों की जगह “कबूल” बोलकर काम चला लो! वैसे भी तुम रात को विवाह करके पिशाच कर्म कर रहे हो, ये कोई विवाह थोड़े ही रह गया है।
विवाह तो बहुत ही पवित्र होता है। तुम तो विवाह के नाम पर न जाने क्या गंद मचा रहे हो।
खैर, मचाते रहो… क्योंकि अब गिनती के ही सनातनी बचे हैं। जो श्रद्धा से अपनी परम्पराओं का पालन करते होंगे
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आर्यपुत्र मनुवादी
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दमा 7 प्रकार का होता है ओर ये एक्यूप्रेशर से ठीक हो सकता है देखिए नीचे ओर पहचानिए आपको किस प्रकार का दमा है
1, उग्र श्वांस नली का दमा दौरा दमे का एकाएक, जब पड़ जाये ऐसे में रोगी जब, लेट न पाये बैठे बैठे झुककर, वो रात बिताये
(इसमें एकाएक सांस छोड़ने में तकलीफ होती है तथा खांसी आती है तथा बलगम निकलता है।)
2, पुराना श्वांस नली का दमा फेफेड़े जनित अस्थमा, जब पुराना हो जाता बैठे में भी सांस फूलना, प्रातः ही प्रारम्भ हो जाता Chronic Bronchial अस्थमा, ये कहलाता (इसमें पुरानी सांस छोड़ने की परेशानी होती तथा खांसी आती है तथा बलगम निकलता है।)
3, Cardiac Asthama हृदय जनित दमा हृदयजनित अस्थमा, जब हो जाता चलने चढ़ने में सांस फूलने, तब लग जाता डाक्टरी भाषा में, Cardiac Asthama ये कहलाता (Cardiac Asthama में exertion से सांस फूलती है)
4, Renal Asthama
किडनी जनित अस्थमा, किडनी जनित अस्थमा, जब हो जाता लेने में सांस, कष्ट तब होने लग जाता डाक्टरी भाषा में Renal Asthama, ये कहलाता (Renal Asthama में सांस लेने में तकलीफ होती है)
5, Asthama caused by Liver लीवर जनित दमा लीवर जनित अस्थमा, व्यक्ति को जब हो जाता ओंठ नाखुन काले, Cyanosis तब हो जाता डाक्टरी भाषा में, Cyanotic Asthma ये कहलाता
6, Allergic Asthama
एलर्जी जनित दमा एलर्जी जनित अस्थमा, व्यक्ति जब हो जाता छींके आती, सांस फूलता, esinophillia भी हो जाता डाक्टरी भाषा में allergic asthama, ये कहलाता
7, . Asthama caused by Spleen प्लीहा जनित दमा प्लीहा जनित अस्थमा, व्यक्ति को जब हो जाता अग्नि मद्य से छाती में गैस, बलगम अवरूद्ध हो जाता डाक्टरी भाषा में Dyspeptic Asthama ये कहलाता
(इसमें बलगम बहुत ज्यादा मात्रा में निकलता है तथा सांस फूलती है। सारा खाया पिया बलगम बन जाता है)
विशेष – , एक्यूप्रेशर से तो ये सब ठीक होगा ही, किंतु यदि आप अनुलोम विलोम शुरू करें शुरुआत अपने अनुसार 5 मिनट से बढ़कर धीरे धीरे धीरे धीरे धीरे समय बढ़ाते हुए कुछ महीने में 40 मिनट लेकर जाइए इससे बहुत लाभ होता है, किंतु बिना हिले डुले करें एक दम स्थिर
ओर साथ में सांसो पर ध्यान लगाना सीखिये ओर अंत में ब्रह्मास्त्र साँस के साथ ओ३म् को जोड़ लीजिए ओ३म् की जो ऊर्जा है वो ओर किसी में नहीं है इसे जोड़िए ओर देखिये फिर इन सबका जादू
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आर्यपुत्र मनुवादी
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बहुत जरूरी सूचना सभी के साथ साझा करें
“आप सभी कृपया यह वीडियो देखिए और समझिए। इससे आपको स्पष्ट हो जाएगा कि आने वाले समय में, और अभी भी, हमें भयंकर रोगों से कैसे लड़ना है। आयुर्वेद का ही भाग यह विद्या आपके जीवन को हर प्रकार से सुरक्षित रखने में सक्षम है और इसका कोई दुष्परिणाम नहीं है। अब तो देश के बड़े-बड़े डॉक्टर, विशेष रूप से वे जो सच्चे भारतीय हैं, स्वयं इसका प्रयोग करके मरीजों को ठीक कर रहे हैं।”
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शक्कातिशाली काले तिल के लड्डू , हड्डियाँ मज़बूत , पाचन मज़बूत , आँतों को चिकनाई देते हैं,
https://youtu.be/UOBIyhAiFcQ?si=CJgjjiUaRUZnESaO
एलोपैथी चिकित्सा पद्धति विदेशी है, इसी कारण इसे सीखने वाले ज़्यादातर लोग प्राकृतिक चिकित्साओं के विरोधी होते हैं और नास्तिक भी, तथा ब्रह्मचर्य के महत्व को नहीं समझते और उसकी निंदा करते हैं।
किंतु योग, आयुर्वेद, एक्यूप्रेशर, प्राकृतिक चिकित्सा, हवन चिकित्सा आदि को सीखने वाले ज़्यादातर लोग आस्तिक होते हैं और अपनी संस्कृति का अधिक सम्मान करते हैं।
मूल बात यह है कि शिक्षा से ही तय होता है कि समाज कैसा बनेगा, और मुख्य प्रश्न यह है कि शिक्षा का मूल क्या है।
क्योंकि भारत और विश्व में फैली प्राचीन, प्रकृति अनुकूल सभी शिक्षाओं का मूल वेद है, इसी कारण यहाँ ब्रह्मचर्य, ईश्वर-भक्ति, परोपकार, करुणा, यम नियम, पर अधिक ज़ोर दिया जाता है।
एक सच यह भी है कि वर्तमान समय में एलोपैथी जैसा फैलाव किसी अन्य चिकित्सा पद्धति का नहीं है। इसलिए आपातकाल में यह आज जीवन-रक्षक का कार्य करती है और आवश्यकता अनुसार इसका प्रयोग करना चाहिए, किंतु इसके साथ थोड़ी सावधानी भी रखनी चाहिए।
एक्यूट रोग में एलोपैथी और क्रोनिक रोगों में एक्यूप्रेशर चिकित्सा।
और यदि कोई जानकार मिल जाए, तो एक्यूट में भी एक्यूप्रेशर बहुत बढ़िया और तेज़ी से काम करता है।
इसी प्रकार आयुर्वेदिक औषधियां भी बहुत बहुत बढ़िया कार्य करती हैं, मेरी जानकारी में किसी को गले में कोई गांठ हुई अंदर की तरफ दर्द होता खाना भी ठीक से ना खाया जाता , कही दिखवाया तो कैंसर बताया किंतु उसने उसमें कोई चीरा फाड़ नहीं करवाई, उसने अपनी चिकित्सा एक आयुर्वेदिक डॉक्टर से करवाई और वो आज ठीक है , ओर बहुत सस्ते में चिकित्सा हो गई, ना उसका घर बिका ना कर्जा हुआ
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आर्यपुत्र
ये वीडियो देखिए देश के सबस बडे डॉक्टर ने सर्जरी में एक्यूप्रेशर से बचाई जान
https://youtu.be/4fqN3CHfi4w?si=-fDOSv-2zQToJ91l
इन्होंने कितने सुंदर तरीके से चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य जी की विजय यात्रा को बताया है
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सच में धन्य हैं वे लोग जो सम्राट विक्रम के समय जन्मे