
GK Trick
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विभिन्न राज्यो के मुख्य नृत्य
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केरल –– कथकली
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पंजाब –– भांगड़ा
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राजस्थान –– घूमर
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असम –– बिहू
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अरुणाचल –– मुखोटा
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गुजरात –– गरबा
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झारखण्ड –– छऊ
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उत्तराखंड –– गढ़वाली
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आंध्र प्रदेश–– कचिपूडि
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छत्तीसगढ़ –– गाडी
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हिमाचल –– धमाल
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गोवा –– मंडी
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पशिम बंगाल –– काठी
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मेघालय –– लावणी
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नागालैंड –– चोंग
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उड़ीसा –– ओड़िसी
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कर्नाटक –– यक्ष ज्ञान
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जम्मू कश्मीर –– राउफ
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तमिलनाडु –– भरतनाट्यम
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उत्तर प्रदेश –– रासलीला
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संसद का संयुक्त सत्र (Joint Session of Parliament
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भारत का संविधान,
अनुच्छेद 108
के तहत दोनों के बीच किसी भी गतिरोध को तोड़ने के लिये लोकसभा और राज्यसभा की संयुक्त बैठक का प्रावधान करता है।
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संयुक्त बैठक राष्ट्रपति द्वारा बुलाई जाती है और इसकी अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष करते हैं।
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अध्यक्ष की अनुपस्थिति में लोकसभा के उपाध्यक्ष बैठक की अध्यक्षता करते हैं।
दोनों की अनुपस्थिति में, इसकी अध्यक्षता राज्य सभा के उपसभापति करते हैं।
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#polity
विपक्ष के नेता/नेता प्रतिपक्ष (Leader of the Opposition)
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ऐसे सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता को सदन में विपक्ष के नेता/नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता दी जाती है जिसने सदन की कुल सीटों का कम से कम दसवें हिस्से पर विजय हासिल की हो।
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वह सरकार की नीतियों की रचनात्मक आलोचना करता है और एक वैकल्पिक सरकार प्रदान करता है।
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दोनों सदनों में विपक्ष के नेता को वर्ष 1977 में वैधानिक मान्यता दी गई थी और वे कैबिनेट मंत्री के बराबर वेतन, भत्ते और अन्य सुविधाओं के हकदार हैं।
विपक्ष के नेता के पद का उल्लेख संविधान में नहीं बल्कि संसदीय संविधि में है।
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संसद में नेता (Leaders in Parliament)
सदन का नेता (Leader of the House)
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लोकसभा के नियमों के अनुसार, 'सदन के नेता' से तात्पर्य प्रधान मंत्री (या प्रधान मंत्री द्वारा सदन के नेता के रूप में कार्य करने के लिये नामित कोई अन्य मंत्री जो लोकसभा का सदस्य है) से है।
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राज्य सभा में भी 'सदन का नेता' होता है जो एक मंत्री और राज्य सभा का सदस्य होता है और इस तरह कार्य करने के लिये प्रधान मंत्री द्वारा इन्हें नामित किया जाता है।
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वह कार्य संचालन पर सीधा प्रभाव डालता/डालती है।
सदन के नेता के पद का उल्लेख संविधान में नहीं बल्कि सदन के नियमों में है।
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शून्यकाल (Zero Hour)
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शून्यकाल
भारतीय संसदीय नवाचार है। संसदीय नियम पुस्तिका में इसका उल्लेख नहीं है
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इसके तहत, संसद सदस्य (सांसद) बिना किसी पूर्व सूचना के मामले उठा सकते हैं।
शून्यकाल, प्रश्नकाल के तुरंत बाद शुरू होता है और तब तक रहता है जब तक कि दिन की कार्यावली (सदन का नियमित कार्य) शुरू नहीं हो जाती।
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दूसरे शब्दों में, प्रश्नकाल और कार्यावली के बीच के समय के अंतराल को शून्य काल के रूप में जाना जाता है।