
Hindu Panchang
*卐~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~卐*
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दिनांक - 26 फरवरी 2026*
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दिन - गुरुवार*
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विक्रम संवत् - 2082*
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अयन - उत्तरायण*
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ऋतु - वसंत*
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मास - फाल्गुन*
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पक्ष - शुक्ल*
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तिथि - दशमी रात्रि 12:33 फरवरी 27 तक तत्पश्चात् एकादशी*
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नक्षत्र - मृगशिरा दोपहर 12:11 तक तत्पश्चात् आर्द्रा*
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योग - प्रीति रात्रि 10:33 तक तत्पश्चात् आयुष्मान्*
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राहुकाल - दोपहर 02:07 से दोपहर 03:34 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
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सूर्योदय - 06:51*
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सूर्यास्त - 06:29 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)*
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दिशा शूल - दक्षिण दिशा में*
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ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 05:12 से प्रातः 06:02 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
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अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:17 से दोपहर 01:03 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
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निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:15 फरवरी 27 से रात्रि 01:04 फरवरी 27 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
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विशेष - दशमी को कलम्बी का शाक खाना त्याज्य है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)*
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मन में शांति की लहरें प्रकट करनेवाली मुद्रा : शांत मुद्रा
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*यह मुदा कोध को शांत करने में अत्यंत लाभदायी है, इसीलिए इसका नाम 'शांत मुद्रा' रखा गया है ।*
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लाभ : (१) जिसे बार-बार क्रोध आता हो या स्वभाव चिड़चिड़ा हो, उसके लिए यह मुद्रा वरदानस्वरूप है । इस मुद्रा से क्रोध तत्काल शांत हो जाता है ।*
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(२) क्रोध के स्पंदनों पर शांति के स्पंदनों का टकराव होने से शरीर का तान-तनाव कम हो जाता है ।*
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(३) मन भी आसानी से शांत हो जाता है । शांतिवर्धक लहरें तन-मन में संचारित होने लगती हैं ।*
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(४) इस मुद्रा को करने पर आप विशेष एकाग्रता का अनुभव करेंगे ।*
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विधि : (१) ध्यान के लिए अनुकूल पड़े ऐसे किसी भी आसन में बैठ जायें। आप यात्रा के समय भी किसी अनुकूल आसन में यह कर सकते हैं ।*
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(२) उँगलियों के अग्रभागों को अँगूठे के अग्रभाग से चारों तरफ से मिलायें। अँगूठे व उँगलियों को थोड़ा- सा मोड़ें, जिससे उँगलियों के अग्रभाग अँगूठे के अग्रभाग से अच्छी तरह मिल जायें ।*
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(३) अँगूठे के अग्रभाग पर एकाग्र हों और उँगलियों की सनसनी अनुभव करें ।*
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मुद्रा-विज्ञान : पाँचों उँगलियाँ मिलाने पर अग्नि, वायु, आकाश, पृथ्वी और जल ये पाँचों तत्त्व इकट्ठे हो जाते हैं । इससे प्राणशक्ति पुष्ट होती है ।*
*卐~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~卐*
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दिनांक - 24 फरवरी 2026*
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दिन - मंगलवार*
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विक्रम संवत् - 2082*
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अयन - उत्तरायण*
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ऋतु - वसंत*
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मास - फाल्गुन*
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पक्ष - शुक्ल*
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तिथि - सप्तमी प्रातः 07:01 तक, तत्पश्चात् अष्टमी प्रातः 04:51 फरवरी 25 तक, तत्पश्चात् नवमी*
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नक्षत्र - कृत्तिका दोपहर 03:07 तक तत्पश्चात् रोहिणी*
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योग - इन्द्र प्रातः 07:24 तक, तत्पश्चात् वैधृति प्रातः 04:26 फरवरी 25 तक, तत्पश्चात् विष्कम्भ*
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राहुकाल - दोपहर 03:34 से शाम 05:01 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
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सूर्योदय - 06:53*
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सूर्यास्त - 06:28 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)*
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दिशा शूल - उत्तर दिशा में*
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ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 05:13 से प्रातः 06:03 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
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अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:17 से दोपहर 01:03 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
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निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:15 फरवरी 25 से रात्रि 01:05 फरवरी 25 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
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व्रत पर्व विवरण - संत दादू दयालजी जयंती, मासिक दुर्गाष्टमी, फाल्गुन अष्टाह्निका विधान प्रारम्भ, त्रिपुष्कर योग, सर्वार्थसिद्धि योग (प्रातः 06:53 से दोपहर 03:07 तक)*
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विशेष - अष्टमी को नारियल का फल खाने से बुद्धि का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)*
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वसंत ऋतु में क्या न करें ?
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1] खट्टे, मधुर, खारे, स्निग्ध (घी – तेल से बने), देर से पचनेवाले व शीतल पदार्थो का सेवन हितकर नहीं है, अत: इनका सेवन अधिक न करें । (अष्टांगह्रदय, चरक संहिता )*
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2] नया गेहूँ व चावल, खट्टे फल, आलू, उड़द की दाल, कमल – ककड़ी, अरवी, पनीर, पिस्ता, काजू, शरीफा, नारंगी, दही, गन्ना, नया गुड़, भैस का दूध, सिंघाड़े, कटहल आदि का सेवन अहितकर है ।*
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3] दिन में सोना, ओस में सोना, रात्रि–जागरण, परिश्रम न करना हानिकारक है । अति परिश्रम या अति व्यायाम भी न करें ।*
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4] आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक्स व फ्रिज के ठंडे पानी का सेवन न करें ।*
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5] एक साथ लम्बे समय तक बैठे या सोयें नहीं तथा अधिक देर तक व ठंडे पानी से स्नान न करें ।*
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ऋषि प्रसाद – फरवरी 2020*
*卐~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~卐*
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*दिनांक - 23 फरवरी 2026*
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*दिन - सोमवार*
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*विक्रम संवत् - 2082*
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*अयन - उत्तरायण*
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*ऋतु - वसंत*
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*मास - फाल्गुन*
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*पक्ष - शुक्ल*
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*तिथि - षष्ठी सुबह 09:09 तक तत्पश्चात् सप्तमी*
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*नक्षत्र - भरणी शाम 04:33 तक तत्पश्चात् कृत्तिका*
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*योग - ब्रह्म सुबह 10:19 तक तत्पश्चात् इन्द्र*
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*राहुकाल - सुबह 08:20 से सुबह 09:47 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
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*सूर्योदय - 06:54*
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*सूर्यास्त - 06:27 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)*
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*दिशा शूल - पूर्व दिशा में*
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*ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 05:14 से प्रातः 06:04 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
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*अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:17 से दोपहर 01:03 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
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*निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:15 फरवरी 24 से रात्रि 01:05 फरवरी 24 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
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*व्रत पर्व विवरण - मासिक कार्तिगई, रवि योग*
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*विशेष - षष्ठी को नीम की पत्ती, फल दातून मुंह में डालने से नीच योनियों की प्राप्ति होती है एवं सप्तमी को ताड़ का फल खाने से रोग बढता है व शरीर का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)*
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*स्नान कैसे करना चाहिये ??*
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*जहाँ से प्रवाह आता हो वहाँ पहले सिर की डुबकी मारें । घर में भी स्नान करे तो पहले जल सिर पर डालें.... पैरों पर पहले नहीं डालना चाहिए । शीतल जल सिर को लगने से सिर की गर्मी पैरों के तरफ जाती है ।*
🔸
*और जहाँ जलाशय है, स्थिर जल है वहाँ सूर्य पूर्वमुखी होकर स्नान करें ।*
🔸
*घर में स्नान करें तो उस बाल्टी के पानी में जौ और तिल अथवा थोड़ा गोमूत्र अथवा तीर्थोद्क पहले (गंगाजल आदि) डाल कर फिर बाल्टी भरें तो घर में भी तीर्थ स्नान माना जायेगा ।- पूज्य बापूजी*
*卐~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~卐*
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दिनांक - 22 फरवरी 2026*
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दिन - रविवार*
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विक्रम संवत् - 2082*
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अयन - उत्तरायण*
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ऋतु - वसंत*
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मास - फाल्गुन*
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पक्ष - शुक्ल*
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तिथि - पंचमी सुबह 11:09 तक तत्पश्चात् षष्ठी*
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नक्षत्र - अश्विनी शाम 05:54 तक तत्पश्चात् भरणी*
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योग - शुक्ल दोपहर 01:09 तक तत्पश्चात् ब्रह्म*
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राहुकाल - शाम 05:00 से शाम 06:27 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
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सूर्योदय - 06:54*
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सूर्यास्त - 06:27 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)*
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दिशा शूल - पश्चिम दिशा में*
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ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 05:15 से प्रातः 06:05 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
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अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:17 से दोपहर 01:04 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
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निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:15 फरवरी 23 से रात्रि 01:05 फरवरी 23 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
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व्रत पर्व विवरण - सर्वार्थसिद्धि योग (प्रातः 06:54 से शाम 05:54 तक), स्कन्द षष्ठी*
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विशेष - पंचमी को बेल खाने से कलंक लगता है एवं षष्ठी को नीम की पत्ती, फल या दातुन मुंह मे डालने से नीच योनियों की प्राप्ति होती है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)*
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किसी की मृत्यु के वक्त
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कहीं भी मृत्यु हो गई तो उसका तुम भला करना । तुलसी की सुखी लकड़ियाँ अपने घर में रख लो । कही भी अपने अड़ोस-पड़ोस में किसी की मृत्यु हुई तो उसके होठों पर, आँखों पर, शरीर पर, छाती पर तुलसी की सुखी लकड़ीयाँ थोड़ी रख लो और तुलसी की लकड़ी से उसका अग्निदान शुरू करो ।*
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उसका कितना भी पाप होगा, दुर्गति से रक्षा होगी, नरकों से रक्षा होगी अथवा तुलसी की लकड़ीयाँ न हो तो तुलसी की माला शव के गले में डाल दो तो भी उसको राहत मिलेगी कर्मबंधन से ।*
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तुलसी के पत्ते उसके मुहँ में डाल दो । तुलसी का पानी जरा छिटक दो । हरी ॐ ॐ ॐ.. का कीर्तन कराओ । फिर हास्य न कराओ । हरी ॐ ॐ... शांति ॐ... तुम अमर आत्मा हो । तुम चैतन्य हो । तुम शरीर नहीं हो । शरीर बदलता है । आत्मा ज्यों का त्यों । ॐ ॐ... कुटुम्बियों को मंगलमय जीवन मृत्यु पुस्तक पढ़ायें और कुटुंबी उसके लिए बोले क्योंकि मृतक व्यक्ति सवा दो घंटे के बाद मूर्छा से जगता है, जैसे आप मुर्दे को देखते हो, ऐसे ही वो अपने मुर्दे शरीर को देखता है । तो सूचना दो । तुम शरीर नहीं हो... तुम अमर आत्मा हो । मरनेवाले तुम नहीं हो ।*
*शरीर का नाम है आप अनाम है । शरीर साकार है, आप निराकार है । शरीर जड़ था आप चेतन हो ॐ ॐ... आपने मृतक व्यक्ति की बड़ी भारी सेवा कर दी । उसके विचारों में आत्मज्ञान भरने का महापुण्य किया है । जो आत्मज्ञान देता है, वो तो ईश्वर रूप हो जाता है । आपका आत्मा तो ईश्वर रूप है ही है । कोई भी मर जाए, चाहे दुश्मन मर जाए, वैर मत रखो । उसकी सदगति हो, उसका भला हो ।*
*पूज्य बापूजी 10th Aug' 2012*
*卐~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~卐*
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दिनांक - 21 फरवरी 2026*
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दिन - शनिवार*
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विक्रम संवत् - 2082*
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अयन - उत्तरायण*
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ऋतु - वसंत*
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मास - फाल्गुन*
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पक्ष - शुक्ल*
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तिथि - चतुर्थी दोपहर 01:00 तक तत्पश्चात् पंचमी*
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नक्षत्र - रेवती शाम 07:07 तक तत्पश्चात् अश्विनी*
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योग - शुभ दोपहर 03:51 तक तत्पश्चात् शुक्ल*
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राहुकाल - सुबह 09:48 से सुबह 11:14 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
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सूर्योदय - 06:55*
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सूर्यास्त - 06:26 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)*
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दिशा शूल - पूर्व दिशा में*
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ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 05:15 से प्रातः 06:05 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
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अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:18 से दोपहर 01:04 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
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निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:15 फरवरी 22 से रात्रि 01:05 फरवरी 22 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
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व्रत पर्व विवरण - विनायक चतुर्थी*
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विशेष - चतुर्थी को मूली खाने से धन का नाश होता है व पंचमी को बेल खाने से कलंक लगता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)*
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शनिवार के दिन विशेष प्रयोग
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शनिवार के दिन पीपल के वृक्ष का दोनों हाथों से स्पर्श करते हुए 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का 108 बार जप करने से दुःख, कठिनाई एवं ग्रहदोषों का प्रभाव शांत हो जाता है । (ब्रह्म पुराण)*
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हर शनिवार को पीपल की जड़ में जल चढ़ाने और दीपक जलाने से अनेक प्रकार के कष्टों का निवारण होता है । (पद्म पुराण)*
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आर्थिक कष्ट निवारण हेतु
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*एक लोटे में जल, दूध, गुड़ और काले तिल मिलाकर हर शनिवार को पीपल के मूल में चढ़ाने तथा ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र जपते हुए पीपल की ७ बार परिक्रमा करने से आर्थिक कष्ट दूर होता है । -
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ऋषि प्रसाद - मई 2018 से*
*卐~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~卐*
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दिनांक - 20 फरवरी 2026*
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दिन - शुक्रवार*
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विक्रम संवत् - 2082*
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अयन - उत्तरायण*
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ऋतु - वसंत*
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मास - फाल्गुन*
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पक्ष - शुक्ल*
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तिथि - तृतीया दोपहर 02:38 तक तत्पश्चात् चतुर्थी*
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नक्षत्र - उत्तर भाद्रपद रात्रि 08:07 तक तत्पश्चात् रेवती*
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योग - साध्य शाम 06:23 तक तत्पश्चात् शुभ*
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राहुकाल - सुबह 11:15 से दोपहर 12:41 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
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सूर्योदय - 06:56*
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सूर्यास्त - 06:26 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)*
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दिशा शूल - पश्चिम दिशा में*
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ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 05:16 से प्रातः 06:06 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
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अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:18 से दोपहर 01:04 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
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निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:15 फरवरी 21 से रात्रि 01:05 फरवरी 21 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
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व्रत पर्व विवरण - अमृतसिद्धि योग, सर्वार्थसिद्धि योग (रात्रि 08:07 से प्रातः 06:55 फरवरी 21 तक)*
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विशेष - तृतीया को परवल खाना शत्रुओं की वृद्धि करने वाला है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)*
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🔹
अंतःकरण के दोष व उनकी निवृत्ति
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(१) चंचलता : सत्य अथवा स्थिर तत्त्व से योग न होने के कारण मन में चंचलतारूपी दोष है, इसीसे अंदर दुर्बलता रहा करती है ।*
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🔸
जगत के देहादिक असत् पदार्थों एवं विषय-सुखों से वैराग्य दृढ होने पर जब अभ्यास के द्वारा एक सत्य आधार में मन स्थिर होता है, तभी इस दोष की निवृत्ति होती है ।*
*
🔸
(२) मलिनता : चित्त में असत् संबंध के कारण असत् चिंतन होते रहने से मलिनतारूपी दोष है, इसीसे खिन्नता रहा करती है ।*
*
🔸
मन के स्थिर होने पर एक ‘सत् पदार्थ के चिंतन में जब चित्त तल्लीन होता है तभी यह दोष दूर होता है ।*
*
🔸
(३) अज्ञान : बुद्धि में आत्मज्ञानी संतपुरुष का संग (सत्संग) न मिलने के कारण अज्ञानरूपी दोष है, इसीसे मनुष्य में मूढता रहा करती है ।*
*
🔸
मन तथा चित्त के स्थिर और शुद्ध होने पर ही मानव-बुद्धि स्वस्थ एवं शांत होकर संत, सद्गुरुदेव से, सुसंग से सद्ज्ञान-प्रकाशपूर्ण होती है । इसीसे अज्ञानरूपी दोष का नाश होता है ।*
*
🔸
(४) ममता : अहं में देहादिक पदार्थों के प्रति ममतारूपी दोष है । इसीके कारण आसक्ति एवं जड़ता रहा करती है ।*
*
🔸
सद्ज्ञान-प्रकाश में ही अहं का मिथ्या पदार्थों के प्रति अहमन्यता (अहंता-इदंता) रूपी दोष सत्स्वरूपाभिमान में परिणत हो जाता है, इसीसे जड़तारूपी दोष की निवृत्ति होती है ।*
*卐~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~卐*
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दिनांक - 19 फरवरी 2026*
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दिन - गुरुवार*
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विक्रम संवत् - 2082*
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⛅
अयन - उत्तरायण*
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ऋतु - वसंत*
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मास - फाल्गुन*
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पक्ष - शुक्ल*
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तिथि - द्वितीया दोपहर 03:58 तक तत्पश्चात् तृतीया*
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नक्षत्र - पूर्व भाद्रपद रात्रि 08:52 तक तत्पश्चात् उत्तर भाद्रपद*
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योग - सिद्ध रात्रि 08:42 तक तत्पश्चात् साध्य*
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राहुकाल - दोपहर 02:07 से दोपहर 03:33 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
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सूर्योदय - 06:57*
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सूर्यास्त - 06:25 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)*
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दिशा शूल - दक्षिण दिशा में*
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ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 05:16 से प्रातः 06:07 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
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अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:18 से दोपहर 01:04 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
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निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:15 फरवरी 20 से रात्रि 01:06 फरवरी 20 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
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व्रत पर्व विवरण - छत्रपति शिवाजी महाराज जयंती, श्री रामकृष्ण परमहंस जयंती, फुलैरा दूज*
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विशेष - द्वितीया को बृहती (छोटा बैंगन या कटेहरी) खाना निषिद्ध है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)*
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गुरुवार विशेष
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हर गुरुवार को तुलसी के पौधे में शुद्ध कच्चा दूध गाय का थोड़ा-सा ही डाले तो, उस घर में लक्ष्मी स्थायी होती है और गुरूवार को व्रत उपवास करके गुरु की पूजा करने वाले के दिल में गुरु की भक्ति स्थायी हो जाती है ।*
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🔸
गुरुवार के दिन देवगुरु बृहस्पति के प्रतीक आम के पेड़ की निम्न प्रकार से पूजा करें :*
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🔸
एक लोटा जल लेकर उसमें चने की दाल, गुड़, कुमकुम, हल्दी व चावल डालकर निम्नलिखित मंत्र बोलते हुए आम के पेड़ की जड़ में चढ़ाएं ।*
*ॐ ऐं क्लीं बृहस्पतये नमः ।*
*फिर उपरोक्त मंत्र बोलते हुए आम के वृक्ष की पांच परिक्रमा करें और गुरुभक्ति, गुरुप्रीति बढ़े ऐसी प्रार्थना करें । थोड़ा सा गुड़ या बेसन की मिठाई चींटियों को डाल दें ।*
*( लोक कल्याण सेतु , अंक - ११६ )*
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🔸
गुरुवार को बाल कटवाने से लक्ष्मी और मान की हानि होती है ।*
*
🔸
गुरुवार के दिन तेल मालिश हानि करती है । यदि निषिद्ध दिनों में मालिश करनी ही है तो ऋषियों ने उसकी भी व्यवस्था दी है । तेल में दूर्वा डाल के मालिश करें तो वह दोष चला जायेगा ।*
https://youtube.com/shorts/oh7-5fnbGh8
*卐~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~卐*
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दिनांक - 18 फरवरी 2026*
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दिन - बुधवार*
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विक्रम संवत् - 2082*
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अयन - उत्तरायण*
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ऋतु - वसंत*
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मास - फाल्गुन*
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पक्ष - शुक्ल*
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तिथि - प्रतिपदा शाम 04:57 तक तत्पश्चात् द्वितीया*
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नक्षत्र - शतभिषा रात्रि 09:16 तक तत्पश्चात् पूर्वभाद्रपद*
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योग - शिव रात्रि 10:45 तक तत्पश्चात् सिद्ध*
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राहुकाल - दोपहर 12:41 से दोपहर 02:07 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
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सूर्योदय - 06:57*
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सूर्यास्त - 06:24 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)*
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दिशा शूल - उत्तर दिशा में*
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ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 05:17 से प्रातः 06:07 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
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अभिजीत मुहूर्त - कोई नहीं*
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निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:16 फरवरी 19 से रात्रि 01:06 फरवरी 19 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
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विशेष - प्रतिपदा को कूष्माण्ड (कुम्हड़ा, पेठा) न खाएं क्योंकि यह धन का नाश करने वाला है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)*
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गृहस्थ-जीवनोपयोगी बातें
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महाभारत में आता है :*
*१] जो धर्म एवं कल्याण-मार्ग में तत्पर हैं और मोक्ष के विषय में जिनका निरंतर अनुराग है वे विवेकी हैं ।*
*२] जो अपने घर पर आ जाय उसे आत्मीयताभरी दृष्टी से देखें, उठकर उसके लिए आसन दें, मन से उसके प्रति उत्तम भाव रखें, मधुर वचन बोले । यह गृहस्थियों का सनातन धर्म है । अतिथि को आते देख उठकर उसकी अगवानी और यथोचित रीति से आदर-सत्कार करें ।*
*३] प्यासे को पानी, भूखे को भोजन, थके-माँदे को बैठने के लिए आसन और रोग आदि से पीड़ित मनुष्य के लिए सोने हेतु शय्या देनी चाहिए ।*
*४] गृहस्थ के भोजन में देवता, पितर, मनुष्य एवं समस्त प्राणियों का हिस्सा रखा जाता है ।*
*५] नित्य प्रात: एवं सायंकाल कुत्तों और कौओं के लिए पृथ्वी पर अन्न डाल दें ।*
*६] निकम्मे पशुओं की भी हिंसा न करें और जिस वस्तु को विधिपूर्वक देवता आदि के लिए अर्पित न करें, उसे स्वयं भी न खायें ।*
*७] यज्ञ, अध्ययन, दान, तप, सत्य, क्षमा, मन और इन्द्रियों का संयम तथा लोभ का परित्याग – ये धर्म के ८ मार्ग हैं ।*
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पूर्णतया संकल्पों को एक ध्येय में लगा देने से, इद्रियों को भली प्रकार वश में कर लेने से, अहिंसा आदि व्रतों का अच्छी प्रकार पालन करने से, भली प्रकार सदगुरु की सेवा करने से, कर्मों को भलीभाँति भगवतसमर्पण करने से और चित्त का भली प्रकार निरोध करने से मनुष्य परम कल्याण को प्राप्त होता है ।*
*लोक कल्याण सेतु- फरवरी २०१९ से*
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~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~
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दिनांक - 17 फरवरी 2026*
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दिन - मंगलवार*
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विक्रम संवत् - 2082*
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अयन - उत्तरायण*
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ऋतु - शिशिर*
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मास - फाल्गुन*
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पक्ष - कृष्ण*
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तिथि - अमावस्या शाम 05:30 तक तत्पश्चात् प्रतिपदा*
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नक्षत्र - धनिष्ठा रात्रि 09:16 तक तत्पश्चात् शतभिषा*
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योग - परिघ रात्रि 12:29 फरवरी 18 तक तत्पश्चात् शिव*
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राहुकाल - दोपहर 03:32 से शाम 04:58 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
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सूर्योदय - 06:58*
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सूर्यास्त - 06:24 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)*
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दिशा शूल - उत्तर दिशा में*
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ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 05:17 से प्रातः 06:08 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
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अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:18 से दोपहर 01:04 तक(उज्जैन मानक समयानुसार)*
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निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:16 फरवरी 18 से रात्रि 01:06 फरवरी 18 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
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व्रत पर्व विवरण - दर्श अमावस्या, द्वापर युगादितिथि*
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विशेष - अमावस्या के दिन स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)*
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ॐ कार मंत्र में 19 शक्तियाँ हैं*
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रक्षण शक्ति : ॐ सहित मंत्र का जप करते हैं तो वह हमारे जप तथा पुण्य की रक्षा करता है । किसी नामदान के लिए हुए साधक पर यदि कोई आपदा आनेवाली है, कोई दुर्घटना घटने वाली है तो मंत्र भगवान उस आपदा को शूली में से काँटा कर देते हैं । साधक का बचाव कर देते हैं। ऐसा बचाव तो एक नहीं, मेरे हजारों साधकों के जीवन में चमत्कारिक ढंग से महसूस होता है ।*
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गति शक्ति : जिस योग में, ज्ञान में, ध्यान में आप फिसल गये थे, उदासीन हो गये थे, किंकर्तव्यविमूढ़ हो गये थे उसमें मंत्रदीक्षा लेने के बाद गति आने लगती है । मंत्रदीक्षा के बाद आपके अंदर गति शक्ति कार्य में आपको मदद करने लगती है ।*
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कांति शक्ति : मंत्रजाप से जापक के कुकर्मों के संस्कार नष्ट होने लगते हैं और उसका चित्त उज्जवल होने लगता है । उसकी आभा उज्जवल होने लगती है, उसकी मति-गति उज्जवल होने लगती है और उसके व्यवहार में उज्जवलता आने लगती है ।*
*इसका मतलब ऐसा नहीं है कि आज मंत्र लिया और कल सब छूमंतर हो जायेगा... धीरे-धीरे होगा। एक दिन में कोई स्नातक नहीं होता, एक दिन में कोई एम.ए. नहीं पढ़ लेता, ऐसे ही एक दिन में सब छूमंतर नहीं हो जाता। मंत्र लेकर ज्यों-ज्यों आप श्रद्धा से, एकाग्रता से और पवित्रता से जप करते जायेंगे त्यों-त्यों विशेष लाभ होता जायेगा ।*
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प्रीति शक्ति : ज्यों-ज्यों आप मंत्र जपते जायेंगे त्यों-त्यों मंत्र के देवता के प्रति, मंत्र के ऋषि, मंत्र के सामर्थ्य के प्रति आपकी प्रीति बढ़ती जायेगी ।*
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तृप्ति शक्ति : ज्यों-ज्यों आप मंत्र जपते जायेंगे त्यों-त्यों आपकी अंतरात्मा में तृप्ति बढ़ती जायेगी, संतोष बढ़ता जायेगा ।*
*जिनको गुरुमंत्र सिद्ध हो गया है उनकी वाणी में सामर्थ्य आ जाता है । नेता भाषण करता है त लोग इतने तृप्त नहीं होते, किंतु जिनका गुरुमंत्र सिद्ध हो गया है ऐसे महापुरुष बोलते हैं तो लोग बड़े तृप्त हो जाते हैं और महापुरुष के शिष्य बन जाते हैं ।*
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अवगम शक्ति : मंत्रजाप से दूसरों के मनोभावों को जानने की शक्ति विकसित हो जाती है । दूसरे के मनोभावों को आप अंतर्यामी बनकर जान सकते हो ।*
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प्रवेश अवति शक्ति : अर्थात् सबके अंतरतम की चेतना के साथ एकाकार होने की शक्ति । अंतःकरण के सर्व भावों को तथा पूर्वजीवन के भावों को और भविष्य की यात्रा के भावों को जानने की शक्ति कई योगियों में होती है । वे कभी-कभार मौज में आ जायें तो बता सकते हैं कि आपकी यह गति थी, आप यहाँ थे, फलाने जन्म में ऐसे थे, अभी ऐसे हैं । जैसे दीर्घतपा के पुत्र पावन को माता-पिता की मृत्यु पर उनके लिए शोक करते देखकर उसके बड़े भाई पुण्यक ने उसे उसके पूर्वजन्मों के बारे में बताया था । यह कथा योगवाशिष्ठ महारामायण में आती है ।*
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श्रवण शक्ति : मंत्रजाप के प्रभाव से जापक सूक्ष्मतम, गुप्ततम शब्दों का श्रोता बन जाता है । जैसे, शुकदेवजी महाराज ने जब परीक्षित के लिए सत्संग शुरु किया तो देवता आये । शुकदेवजी ने उन देवताओं से बात की । माँ आनंदमयी का भी देवलोक के साथ सीधा सम्बन्ध था । और भी कई संतो का होता है । दूर देश से भक्त पुकारता है कि गुरुजी ! मेरी रक्षा करो... तो गुरुदेव तक उसकी पुकार पहुँच जाती है !*