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amoghclasses
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EDОбщее образование и новости
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Мужской
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25-34
Финансовый статус аудитории
Средний
Профессии аудитории
Государственный и публичный сектор
Краткое описание
February 26, 15:07

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लेखपाल 2025 एग्जाम देने वाले अभ्यर्थी ध्यान दें
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पंचायत चुनाव 2026 का टलने का उम्मीद है
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यदि चुनाव टला तो,आपका एग्जाम अप्रैल लास्ट या मई के पहले सप्ताह में हो सकता Join
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February 26, 14:21

लेखपाल मुख्य परीक्षा शार्टलिस्ट नोटिस

February 26, 14:20

जूनियर एसिस्टेंट 5512 टाइपिंग रिजल्ट

February 26, 14:13
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लेखपाल मुख्य परीक्षा शार्टलिस्ट नोटिस

February 26, 13:50
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Uppsc सहायक कुल सचिव परीक्षा...
#cutoff

February 26, 11:55

📕
क्रिप्स मिशन
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मार्च, 1942 में भारत आया।
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प्रस्ताव
1. युद्ध के बाद भारत को डोमिनियन राज्य का दर्जा दिया जाएगा जो किसी बाहरी सत्ता के अधीन नहीं होगा।
2. भारतीयों को अपना संविधान निर्मित करने का अधिकार दिया जाएगा, जिसके लिए युद्ध के बाद एक संविधान निर्मात्री परिषद बनेगी, जिसमें ब्रिटिश भारत के प्रांतों के निर्वाचित सदस्य और देशी रजवाड़ों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
3. ब्रिटिश भारत का कोई प्रांत यदि नए संविधान को स्वीकार न करना चाहे, तो उसे वर्तमान संवैधानिक स्थिति बनाए रखने का अधिकार होगा। नए संविधान को न स्वीकार करने वाले प्रांतों को अपना अलग संविधान बनाने की आज्ञा होगी।
4. युद्ध के दौरान ब्रिटिश वायसराय की एक नई कार्यकारी परिषद का गठन किया जाएगा, जिसमें भारतीय जनता के प्रमुख वर्गों के प्रतिनिधि शामिल होंगे लेकिन रक्षा मंत्रालय ब्रिटिश नेतृत्व के पास होगा।
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महात्मा गांधी ने इसे 'उत्तर तिथीय चेक' (Post-Dated Cheque) की संज्ञा दी।
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क्रिप्स मिशन के साथ कांग्रेस के आधिकारिक वार्ताकार पंडित जवाहरलाल नेहरू एवं मौलाना आजाद थे।
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February 26, 10:54

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राष्ट्रपति की क्षमादान करने की शक्ति
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संविधान के अनुच्छेद 72 के तहत राष्ट्रपति के पास अपराध के लिये दोषी ठहराए गए किसी भी व्यक्ति की सजा को माफ करने, राहत देने, छूट देने या निलंबित करने, हटाने या कम करने की शक्ति होगी. जहाँ दंड मौत की सजा के रूप में है।
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राष्ट्रपति सरकार से स्वतंत्र होकर अपनी क्षमादान की शक्ति का प्रयोग नहीं कर सकता। कई मामलों में सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय सुनाया है कि राष्ट्रपति को दया याचिका पर फैसला करते समय मंत्रिपरिषद की सलाह पर कार्य करना होता है।
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अनुच्छेद 72 के तहत राष्ट्रपति की क्षमादान शक्ति का दायरा अनुच्छेद 161 के तहत राज्यपाल की क्षमादान शक्ति से अधिक व्यापक है क्यूंकि राष्ट्रपति को सैन्य न्यायालयों के मामले और मृत्यु दंड की सजा भी समाप्त करने का अधिकार है जबकि राज्यपाल के पास ये अधिकार नही है। राष्ट्रपति की क्षमादान शक्तियों में निम्नलिखित बात शामिल है-
👉
क्षमा में दंड और बंदीकरण दोनों को हटा दिया जाता है तथा दोषी की सजा को दंड, दंडादेशों एवं निर्हर्ताओं से पूर्णतः मुक्त कर दिया जाता है।
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लघुकरण में दंड के स्वरुप में परिवर्तन करना शामिल है, उदाहरण के लिये मृत्युदंड को आजीवन कारावास और कठोर कारावास को साधारण कारावास में बदलना।
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परिहार में दंड की अवधि को कम करना शामिल है, उदाहरण के लिये दो वर्ष के कारावास को एक वर्ष के कारावास में परिवर्तित करना।
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विराम के अंतर्गत किसी दोषी को प्राप्त मूल सजा के प्रावधान को किन्हीं विशेष परिस्थितियों में बदलना शामिल है। उदाहरण के लिये महिला की गर्भावस्था की अवधि के कारण सजा को परिवर्तित करना।
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#roaro

February 26, 07:43

LEKHPAL THEORY PYQ's + MCQ's 2026-27.pdf

February 26, 07:42
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February 26, 06:49

📕
संविधान में संशोधन की प्रक्रिया
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संविधान के भाग 20 के अनुच्छेद 368 में संसद को संविधान एवं इसकी व्यवस्था में संशोधन की शक्ति प्रदान करता है।
यह प्रावधान करता है कि संसद अपनी संवैधानिक शक्ति का प्रयोग करते हुए संविधान के किसी उपबंध कापरिवर्धन, परिवर्तन या निरसन के रूप में संशोधन कर सकती है।
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हलाकि संसद उन व्यवस्थाओ को संशोधित नही कर सकती जो संविधान के मूल ढांचे की संरचना से सम्बद्ध हो यह व्यवस्था उच्चतम न्यायलय द्वारा केशवानंद भारती मामले (1973) में की।
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अनुछेद 368 के अंतर्गत यह निम्नलिखित तरीके से हो सकती है-
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संविधान के संशोधन का आरम्भ संसद के किसी भी सदन में किया जा सकता है किन्तु राज्य विधान मंडल में नही।
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विधेयक को मंत्री या गैर सरकारी सदस्यों द्वारा पुर्स्थापित किया जा सकता है।
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विधेयक को दोनो सदनों में विशेष बहुमत से पारित कराना अनिवार्य है।
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दोनों ही सदनों में विधेयक अलग अलग पारित होना चाहिए और असहमति या गतिरोध की की स्थिति में संयुक्त बैठक का कोई प्रावधान नही है।
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विधेयक के संघीय व्यवस्था से सम्बंधित होने पर उसे आधे राज्यों के विधानमंडल से भी सामान्य बहुमत से पारित होना चाहिए।
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राष्ट्रपति विधेयक को सहमती देंगे क्यूंकि वे विधेयक को न तो अपने पास रख सकते है और न ही संसद के पास पुनर्विचार के लिये भेज सकते है। राष्ट्रपति की सहमति के बाद विधेयक अधिनियम बन जाता है।
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