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ब्रह्मचर्य

brahmacharyalife
ब्रह्मचर्य ही जीवन है 🙏🏻 समूह का लिंक 👇 👇 @brahmacharya1 🚩 🚩 🚩 🚩 🚩 🚩 #ब ्रह्मचर्य #आय ुर्वेद #य ोग #म ोटिवेशन #व ेद #अध ्यात्म #सन ातन #ध ्यान #स ाधना_उपासना #ज ्ञान #धर ्म #श ांति ब्रह्मचर्य शक्ति (Brahmacharya Shakti), वीर्य रक्षा (Semen Retention)
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Insights from AI analysis of channel posts
Channel category
Religion and Spirituality
Audience gender
Female
Audience age
35-44
Audience financial status
Middle
Audience professions
Psychology & Counseling
Summary
February 26, 08:28

उठो!अपने आपको भगवान को अर्पित करो अपनी चिंता दुख तनाव सब भगवान को अर्पित करो तुम अकेले नहीं हो।

February 25, 07:03
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February 25, 02:37

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गीता का सिद्धांत है - 'आत्मवत सर्व भूतेषु य: पश्यति सः पण्डितः' I जो सबको अपने समान देखता है वही सच्चा ज्ञानी है I
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The Gita's principle is : - "One who sees all being as oneself is truly wise."
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February 24, 14:55
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February 24, 10:19

https://youtu.be/XXYZ2vaKCSA?si=OOH2kIYD8pBjacOL

February 23, 15:14

सड़क के किनारे किसी का घर हो तो यदि कोई कहे की बैलगाड़ी नहीं आये केवल गाड़िया आये तो झगड़ा हो जायेगा
गाड़ियों को जैसे हम देखते रहते है किसी से जुड़ते नहीं कोई आओ जाओ वैसे मन मे अनुकूलता,प्रतिकूलता अच्छे बुरे विचार, परिस्थितियों की गाड़िया आएगी जाएगी आप बस आत्मा मे बैठकर देखते रहो
( साक्षी भाव)
तो शांति बनी रहेंगी।

February 23, 04:21

हम धीरे-धीरे वैसे बनते जाते हैं, जिसे हम बार-बार याद करते हैं।
स्मरण केवल किसी का चेहरा नहीं लाता,
उसके गुण भी हमारे भीतर जगाने लगता है।
मन जिन विचारों को दोहराता है,
वे ही हमारे स्वभाव का हिस्सा बन जाते हैं।
यदि हम भय को पकड़े रहें, तो अस्थिरता बढ़ती है।
यदि हम ईश्वर को याद करें, तो शक्ति और शांति भीतर उतरने लगती है।
ईश्वर का स्मरण केवल पूजा नहीं,
एक ऊँची चेतना से जुड़ना है।
जिससे रोज़ जुड़ते हो,
वैसी ही ऊर्जा जीवन में उतरती है।

February 23, 00:38

ओ३म् नाम जपना
@vaidic_bhajan

February 22, 08:59

लोग कहते हैं कि "बुरा देखना पाप है, बुरा सुनना पाप है, बुरा बोलना पाप है, और शरीर से बुरे काम करना भी पाप है।" जी हां, लोग ठीक कहते हैं। *"बुरा देखना बुरा सुनना और शरीर से बुरे काम करना, यह सब पाप है।"*
परंतु वेद आदि शास्त्र कहते हैं कि *"पाप केवल इतना ही नहीं है। बल्कि इन सब का मूल कारण है बुरा सोचना। जैसे बुरा देखना पाप है, बुरा सुनना बुरा बोलना बुरे काम करना भी पाप है। ऐसे ही इन सब का मूल कारण "बुरा सोचना" भी पाप है।"*
*"जो व्यक्ति जैसा सोचता है, वह वैसा ही देखता सुनता बोलता और वैसे ही काम करता है।"* इसका अर्थ हुआ कि *"सब पापों का मूल कारण "बुरा सोचना" ही है।"*
यदि आप बुरे कामों या पापों से बचना चाहते हों, तो इसका उपाय यही है, कि *"अपने चिंतन को ठीक करें। अपने सोचने को ठीक करें।बुरा न सोचें, बल्कि अच्छा सोचें। अपने लिए भी और दूसरों के लिए भी सबके लिए अच्छा सोचें।"*
"यदि आप इस प्रकार से अपने चिंतन को ठीक करके अच्छा देखेंगे अच्छा सुनेंगे अच्छा बोलेंगे और शरीर से भी अच्छे काम करेंगे। तो इन सब अच्छे कर्मों को करके आप बहुत सा पुण्य कमाएंगे।"*
*"और यदि आप पुण्य कर्मों का आचरण करेंगे, तो निश्चित रूप से ईश्वर आपको सुख देगा। आपका यह जन्म भी सुखदायक होगा और अगला भी।"*
*"अतः अच्छा सोचें, अच्छा बोलें। अच्छा देखें अच्छा सुनें और शरीर से भी अच्छे काम ही करें।"*
---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."*

February 22, 08:58
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